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जानिए फ्लू (इन्फ्लूएंजा) के प्रमुख कारण और बचाव

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इन्फ्लूएंजा को फ्लू के नाम से भी जाना जाता है। यह एक विशेष समूह के वायरस के कारण मानव समुदाय में होने वाला एक संक्रामक रोग है। इसकी शुरुआत खांसी, जुकाम और हल्के बुखार के साथ होती है। अगर इस बीमारी पर ध्यान न दिया जाए, तो यह बीमारी काफ़ी घातक साबित हो सकती है। हम आपको विस्तार से फ्लू (इन्फ्लूएंजा) के लक्षण और बचाव के बारे में बताते हैं।

1. फ्लू (इन्फ्लूएंजा) क्या है?

यह एक तरह की बीमारी है, जो RNA वायरस की वजह से होती है। यह वायरस जानवरों, पक्षियों व इंसानों की श्वसन नली को संक्रमित करते हैं। आमतौर पर लोगों में इस वायरस के संक्रमण से बुखार, खाँसी, सिर दर्द और थकान जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। इसके अलावा कुछ लोगों में मतली, उल्टी, दस्त और गले में खराश जैसे लक्षण भी पाए जाते हैं।

अधिकांश व्यक्तियों में फ्लू के लक्षण लगभग एक से दो सप्ताह तक रहते हैं। उसके बाद रोगी स्वस्थ हो जाता है। अन्य वायरल श्वसन संक्रमण (जैसे-जुखाम) की तुलना में फ्लू संक्रमण में व्यक्ति ज़्यादा गंभीर रूप से बीमार हो सकता है। इस वायरस से संक्रमित व्यक्तियों की मृत्यु दर का आंकड़ा लगभग 0.1 % है। हर साल एक विशेष मौसम में फैलने वाले फ्लू के लिए उपरोक्त परिस्थितियाँ सामान्य हैं। कभी-कभी फ्लू बहुत गंभीर रूप से फैल जाता है। इसका गंभीर प्रकोप तब सामने आता है, जब आबादी का ऐसा हिस्सा इसकी चपेट में आ जाता है, जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमज़ोर होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि फ्लू वायरस ने अपने आपको विशेष रूप से परिवर्तित कर लिया है। इस तरह के हालात एक महामारी का रूप धारण कर लेते हैं।

2. फ्लू के लक्षण

  1. संक्रमण के दौरान रोगी को 100 डिग्री से लेकर 103 डिग्री तक बुखार हो सकता है, हालाँकि बच्चों में बुखार का तापमान इससे भी अधिक हो सकता है। कभी-कभी चेहरे पर निस्तब्धता या पसीना आने जैसे लक्षण भी देखे जा सकते हैं।
  2. ठंड लगना।
  3. खाँसी
  4. गले में खराश
  5. नाक बहना या नाक बंद होना
  6. छींक आना
  7. सिरदर्द
  8. मांसपेशियों में दर्द
  9. कभी-कभी बहुत ज़्यादा थकान महसूस करना

सामान्य फ्लू वायरस की तुलना में H1N1 वायरस से मतली, उल्टी और दस्त अधिक होता है। संक्रमण की गंभीरता के आधार पर  कुछ रोगियों में लसिका ग्रंथियों में सूजन, मांसपेशियों में दर्द, सांस लेनें में तकलीफ़, सिर दर्द, सीने में दर्द और शरीर में पानी की कमी देखी जा सकती है। यहाँ तक ​​कि मौत भी हो सकती है। फ्लू (इन्फ्लूएंजा) से संक्रमित अधिकतर व्यक्ति एक या दो सप्ताह में स्वस्थ हो जाते हैं। हालाँकि कुछ लोगों में निमोनिया जैसी खतरनाक बीमारी विकसित हो सकती है। फ्लू से देश भर में एक साल में लगभग 36,000 लोगों की मौत होती है और कई लोग अस्पताल में भर्ती होते हैं। इन्फ्लुएंजा वायरस किसी भी उम्र  के लोगों को संक्रमित कर सकता है। हालाँकि युवाओं और स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना में अधिक आयु वाले तथा लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझने वाले लोगों में इन्फ्लूएंजा वायरस के संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है।

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3. फ्लू के जोखिम कारक

कुछ ऐसे कारक जो इन्फ्लूएंजा के जोखिम को अधिक बढ़ा सकते हैं।

  1. मौसमी इन्फ्लूएंजा युवा, बच्चों और बुज़ुर्गों को संक्रमित करता है।
  2. जो लोग नर्सिंग होम या सैन्य बैरकों में रहते हैं, या साथ में काम करते हैं, उनमें इन्फ्लूएंजा होने की संभावना अधिक होती है।
  3. कैंसर का उपचार, एंटी रिजेक्शन ड्रग्स, कोर्टिकोस्टेरोइड और एचआईवी/एड्स आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देते हैं। जिससे इन्फ्लूएंजा का संक्रमण हमारे शरीर में आसानी से हो सकता है।
  4. अधिक समय से चल रही बीमारियां जैसे-अस्थमा, मधुमेह या दिल की समस्याओं से पीड़ित लोगों में इन्फ्लूएंजा के संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है।
  5. गर्भवती महिलाओं में इन्फ्लूएंजा के संक्रमण की संभावना ज़्यादा होती है, खासकर दूसरे और तीसरे माह में, जिन महिलाएं में दो सप्ताह का प्रसवोत्तर होता है, वे भी इसकी चपेट में आसानी से आ जाती  हैं।
  6. जिन लोगों में BMI का स्तर 40 से अधिक होता है, उन लोगों में इन्फ्लूएंजा के संक्रमण के खतरे की संभावना ज़्यादा होती है।

4. फ्लू से बचाव

Via: thewire.in

1. तरल पदार्थ लें

वायरस होने के चलते बुखार होता है। जिसके चलते पानी की कमी हो जाती है। इस कमी को पूरा करने के लिए तरल पदार्थ लेना चाहिए। इससे शरीर में पानी की पूर्ति होने के साथ हीं साइनस में फायदा करता है।

2. गर्म पानी का इस्तेमाल करें

इन्फ्लूएंजा वायरस से पीड़ित को गर्म पानी से नहाना चाहिए। ऐसा करने से गले में जमा कफ पिघलता है। इसके अलावा स्टीम लेना बहुत असरकारक होता है। स्टीम लेने से सांस लेने में होने वाली दिक्कत में फायदा होता है।

3. अजवाइन का पानी पिएं

अजवाइन के पानी को पिएं। इसके लिए अजवाइन को पानी में डालकर उबालें और जब पानी आधा रह जाए तो इस पानी को पिएं। इसके अलावा सादे पानी का भी उबाल कर ही सेवन करें।

4. स्वच्छता पर ध्यान दें

इन्फ्लूएंजा वायरस हो जाने पर सबसे पहले तो स्वच्छता पर ध्यान दें। जैसे खाना खाने से पहले हाथों को जरूर धोएं। इसके अलावा शरीर को अधिक से अधिक आराम दें।

5. बासी खाने से दूर रहें

इन्फ्लूएंजा वायरस हो जाने पर बासी खाने का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने खाद्य पदार्थ का सेवन करें।

6. डॉक्टर को दिखाएं

कम बुखार को भी हल्के में ले। बुखार आने पर डॉक्टर को दिखाएं। छाती में दर्द, सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई देने पर भी डॉक्टर से संपर्क करें।

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5. फ्लू के दौरान क्या खाएँ?

बेहतर पोषक तत्व आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत बनाते हैं। जिससे आपके शरीर को वायरस से लड़ने की ताकत मिलती है, लेकिन जब हमारा शरीर फ्लू के लक्षणों से कई दिन या सप्ताह भर जूझता है। उस समय ये पौष्टिक आहार हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बहुत जरुरी होते हैं।

1. चिकन सूप

इस सूप को इसकी गुणवत्ता की वजह से सैकड़ों वर्षों से साधारण सर्दी-जुकाम के लिए एक उपाय के रूप में उपयोग किया जाता है। यह सूप विटामिन, खनिज, कैलोरी और प्रोटीन का एक आसान स्रोत है। जब आप बीमार होते हैं, तो चिकन सूप आपके शरीर को उचित मात्रा में पोषक तत्व प्रदान करता है।

2. लहसुन

लहसुन का उपयोग सदियों से एक औषधीय जड़ी-बूटी के रूप में किया जाता है। लहसुन एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटिफंगल का काम भी करती है। इससे रोगों से लड़ने की (रोग प्रतिरोधक) क्षमता में भी वृद्धि होती है।

3. नारियल पानी

बीमारी के समय सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, कि आप अपने शरीर में पानी की कमी न होने दें। ऐसी स्थिति में नारियल पानी सबसे उत्तम पेय पदार्थ होता है। मीठा और स्वादिष्ट होने के अलावा इसमें ग्लूकोज़ और इलेक्ट्रोलाइट्स शामिल होते हैं, जो शरीर में पानी की कमी को पूरा करते हैं।

4. गर्म चाय

सर्दी और फ्लू से संबंधित कई लक्षणों से बचाव के लिए गर्म चाय एक पसंदीदा उपाय है। चिकन सूप की तरह गर्म चाय नाक और साइनस से बलगम को साफ़ करने में मदद करती है।

5. शहद

रोगाणुरोधी यौगिकों की उच्च मात्रा के कारण शहद एक प्रभावी जीवाणुरोधी की तरह काम करता है। कुछ तथ्यों से इस बात का पता चलता है कि शहद से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। ये सभी गुण शहद को बीमारी में खाया जाने वाला सर्वोत्तम आहार बनाते हैं। बैक्टीरिया संक्रमण के कारण गले में खराश होने पर शहद विशेष रूप से कारगर साबित होता है।

6. अदरक

अदरक को मतली रोकने के लिए के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। अदरक नोन-स्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (सूजन कम करने वाली दवा) दवाओं के समान कार्य करती है। तो अगर आप उलटी जैसा महसूस कर रहे हैं या आपका जी घबरा रहा हो, तो अदरक सबसे उत्तम और असरदार उपाय है।

7. हरी सब्ज़ियाँ

 

बीमार होने पर आपके शरीर को सभी प्रकार के विटामिन और खनिजों की ज़रूरत होती है, लेकिन यह पूर्ति रोगी द्वारा खाये जाने वाले साधारण भोजन से संभव नहीं है। हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, जैसे– पालक और सलाद विटामिन, खनिज और रेशे से भरपूर होती हैं। वे विशेष रूप से विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन K और फोलेट के अच्छे स्रोत हैं।

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